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बनाया मुझ को अपना है तेरा एहसान है मुर्शिद / Banaya Mujh Ko Apna Hai Tera Ehsan Hai Murshid

बनाया मुझ को अपना है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! मिला मुझ को ये रुत्बा है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! तेरी निस्बत ने मुझ को कर दिया है क्या से क्या, मुर्शिद ! रखा क्या मुझ में वर्ना है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! भटकता फिर रहा था दश्त-ए-'इस्याँ में यूँही बेकस दिखाया तू ने रस्ता है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! ये फ़ैशन का था शैदाई, यूँही फिरता था नंगे सर ये जो सर पर 'अमामा है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! ज़बाँ पर गालियाँ, होंटों पे गाने थे कभी जारी ये जो लब पर मदीना है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! ये निगराँ है, ये हाफ़िज़ है, ये क़ारी, ये मुबल्लिग़ है सभी पे तेरा साया है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! नमाज़ों की हिफ़ाज़त का, 'इबादत का, तिलावत का मिला जो भी ये जज़्बा है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! ये मदनी क़ाफ़िलों का, मदनी इन'आमात का तू ने दिया उम्मत को तोहफ़ा है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! हया की चादर-ए-ने'मत 'अता कर दी उसे तू ने ये करती अब जो पर्दा है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! ये हाए क्या मैं करता हूँ, तुझे नाराज़ करता हूँ मुझे फिर भी निभाया है, तेरा एहसान है मुर्शिद ! मैं हूँ मँगता तेरा...

बहुत रंजीदा-ओ-ग़मगीन है दिल या रसूलल्लाह / Bahut Ranjeeda-o-Ghamgeen Hai Dil Ya Rasoolallah

बहुत रंजीदा-ओ-ग़मगीन है दिल, या रसूलल्लाह ! करम कर दो, कली दिल की उठे खिल, या रसूलल्लाह ! बलाओं ने मुझे हर सम्त से कुछ ऐसा घेरा है मेरे बढ़ते ही जाते हैं मसाइल, या रसूलल्लाह ! दिल-ए-मग़्मूम का सब हाल, आक़ा ! तुम पे ज़ाहिर है शहा ! हूँ मरहम-ए-तस्कीं का साइल, या रसूलल्लाह ! ग़म-ओ-आलाम का मारा हूँ, आक़ा ! बे-सहारा हूँ मेरी आसान हो हर एक मुश्किल, या रसूलल्लाह ! तुम्हें देता हूँ, मौला ! वासिता मैं चार यारों का मेरे हो जाएँ तय मुश्किल मराहिल, या रसूलल्लाह ! जो तू चाहे तो मेरे ग़म की बेड़ी गिर पड़े कट कर नहीं तेरे लिए ये कोई मुश्किल, या रसूलल्लाह ! शहा ! मंडला रही है मौत सर पर फिर भी मेरा नफ़्स गुनाहों की तरफ़ हर-दम है माइल, या रसूलल्लाह ! गुनाहों के सभी अमराज़, आक़ा ! दूर फ़रमा दो सँवर जाएँ मेरे सब बद-ख़साइल, या रसूलल्लाह ! कुछ ऐसी आग उल्फ़त की लगा दो मेरे सीने में मैं तड़पूँ ख़ूब तड़पूँ मिस्ल-ए-बिस्मिल, या रसूलल्लाह ! अभी बन जाए बिगड़ी तेरे इक अदना इशारे से तेरे अत्तार के हल हों मसाइल, या रसूलल्लाह ! शायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: हाजी मुश्ताक़ अत्तारी असद रज़ा क़ादरी ...

इक मैं ही नहीं उन पर क़ुर्बान ज़माना है / Ik Main Hi Nahin Un Par Qurban Zamana Hai | Ek Main Hi Nahi Un Par Qurban Zamana Hai

इक मैं ही नहीं, उन पर क़ुर्बान ज़माना है जो रब्ब-ए-दो-'आलम का महबूब यगाना है कल पुल से हमें जिस ने ख़ुद पार लगाना है ज़हरा का वो बाबा है, हसनैन का नाना है उस हाशमी दूल्हा पर कौनैन को मैं वारूँ जो हुस्न-ओ-शमाइल में यकता-ए-ज़माना है 'इज़्ज़त से न मर जाएँ क्यूँ नाम-ए-मुहम्मद पर हम ने किसी दिन यूँ भी दुनिया से तो जाना है आओ दर-ए-ज़हरा पर फैलाए हुए दामन है नस्ल करीमों की, लजपाल घराना है हूँ शाह-ए-मदीना की मैं पुश्त-पनाही में क्या इस की मुझे पर्वा दुश्मन जो ज़माना है ये कह के दर-ए-हक़ से ली मौत में कुछ मोहलत मीलाद की आमद है, महफ़िल को सजाना है क़ुर्बान उस आक़ा पर कल हश्र के दिन जिस ने इस उम्मत-ए-'आसी को कमली में छुपाना है सौ बार अगर तौबा टूटी भी तो हैरत क्या बख़्शिश की रिवायत में तौबा तो बहाना है हर वक़्त वो हैं मेरी दुनिया-ए-तसव्वुर में ऐ शौक़ ! कहीं अब तो आना है न जाना है पुर-नूर सी राहें हैं, गुंबद पे निगाहें हैं जल्वे भी अनोखे हैं, मंज़र भी सुहाना है हम क्यूँ न कहें उन से रूदाद-ए-अलम अपनी जब उन का कहा ख़ुद भी अल्लाह ने माना है महरूम-ए-करम इस को रखिए न सर-ए-महशर जैसा ह...

हस्बी रब्बी जल्लल्लाह | तेरे सदक़े में आक़ा सारे जहाँ को दीन मिला / Hasbi Rabbi Jallallah | Tere Sadqe Mein Aaqa Sare Jahan Ko Deen Mila

हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाह नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह तेरे सदक़े में, आक़ा ! सारे जहाँ को दीन मिला बे-दीनों ने कलमा पढ़ा, ला-इलाहा-इल्लल्लाह सिम्त-ए-नबी बू-जहल गया, आक़ा से उस ने ये कहा गर हो नबी बतलाओ ज़रा, मेरी मुट्ठी में है क्या ? आक़ा का फ़रमान हुआ और फ़ज़्ल-ए-रहमान हुआ मुट्ठी से पत्थर बोला, ला-इलाहा-इल्लल्लाह हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाह नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह अपनी बहन से बोले 'उमर, ये तो बता क्या करती थी ? मेरे आने से पहले क्या चुपके चुपके पढ़ती थी ? बहन ने जब क़ुर'आन पढ़ा, सुन के कलाम-ए-पाक-ए-ख़ुदा दिल ये 'उमर का बोल उठा, ला-इलाहा-इल्लल्लाह हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाह नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह वो जो बिलाल-ए-हब्शी है, सरवर-ए-दीं का प्यारा है दुनिया के हर 'आशिक़ की आँखों का वो तारा है ज़ुल्म हुए कितने उस पर, सीने पर रखा पत्थर फिर भी लब पर जारी था, ला-इलाहा-इल्लल्लाह हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाह नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल...

हर लब पे है तराना इल्यास क़ादरी का, दिल हो गया दीवाना इल्यास क़ादरी का / Har Lab Pe Hai Taraana Ilyas Qadri Ka, Dil Ho Gaya Deewaana Ilyas Qadri Ka

हर लब पे है तराना इल्यास क़ादरी का दिल हो गया दीवाना इल्यास क़ादरी का जो एक बार देखे, बस देखता ही जाए इतना हसीन चेहरा दिल में उतरता जाए किरदार इन का सुथरा, अख़्लाक़ इन का आ'ला यूँ ही नहीं है शोहरा इल्यास क़ादरी का हर लब पे है तराना इल्यास क़ादरी का दिल हो गया दीवाना इल्यास क़ादरी का जो ना'त पढ़ रहा हूँ, तेरा करम है, मुर्शिद ! सर पर सजा इमाम, तेरी नज़र है, मुर्शिद ! दुनिया सँवर गई है, 'उक़्बा निखर गई है दामन मिला है किस का ! इल्यास क़ादरी का हर लब पे है तराना इल्यास क़ादरी का दिल हो गया दीवाना इल्यास क़ादरी का मौला ! मेरी दु'आ है, मुर्शिद रहे सलामत हो आफ़त-ओ-बला से 'अत्तार की हिफ़ाज़त साया रहे सलामत 'अत्तारियों पे हर दम फ़ैज़ान हो हमेशा इल्यास क़ादरी का हर लब पे है तराना इल्यास क़ादरी का दिल हो गया दीवाना इल्यास क़ादरी का 'अत्तार से है निस्बत, 'अत्तार से है उल्फ़त 'अत्तार का गदा हूँ, ये देखो मेरी क़िस्मत माँ की दु'आ से दामन 'अत्तार का मिला है बन कर रहूँगा मँगता इल्यास क़ादरी का हर लब पे है तराना इल्यास क़ादरी का दिल हो गया दीवाना इल्यास क़ादरी...

मुद्दत से मेरे दिल में है अरमान-ए-मदीना, रौज़े पे बुला लीजिए, सुल्तान-ए-मदीना ! / Muddat Se Mere Dil Mein Hai Armaan-e-Madina, Rauze Pe Bula Lijiye, Sultan-e-Madina !

मुद्दत से मेरे दिल में है अरमान-ए-मदीना रौज़े पे बुला लीजिए, सुल्तान-ए-मदीना ! ए काश ! पहुँच के दर-ए-जानान-ए-मदीना हो जाऊँ मैं सो जान से क़ुर्बान-ए-मदीना मुद्दत से मेरे दिल में है अरमान-ए-मदीना आते हैं मुक़द्दर के सिकंदर तेरे दर पर बे-इज़्न हो कैसे कोई मेहमान-ए-मदीना ! मुद्दत से मेरे दिल में है अरमान-ए-मदीना आग ऐसी लगा दीजिए क़ल्ब और जिगर में रोता रहूँ, तड़पा करूँ, ए जान-ए-मदीना ! मुद्दत से मेरे दिल में है अरमान-ए-मदीना अब सिंध के जंगल में मेरा जी नहीं लगता बस मुझ को बुला लीजे गुलिस्तान-ए-मदीना मुद्दत से मेरे दिल में है अरमान-ए-मदीना कर दीजिए दीदार से आँखें मेरी ठंडी ए जान-ए-जहाँ ! सय्यिद-ओ-सुल्तान-ए-मदीना मुद्दत से मेरे दिल में है अरमान-ए-मदीना क़दमों में बुला लीजिए बद-कार को, आक़ा ! और इस को बना लीजिए मेहमान-ए-मदीना मुद्दत से मेरे दिल में है अरमान-ए-मदीना अत्तार को दौलत न हुक़ूमत की तलब है दे दीजे बक़ीअ' इस को तो सुल्तान-ए-मदीना शायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरी नात-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी - असद अत्तारी और फ़राज़ अत्तारी - आसिफ़ अत्तारी Muddat Se Mere Dil Mein Hai L...